जयपुर। आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा है कि जैन धर्म ही नहीं, सभी धर्मों में तप का बहुत महत्व है। यह अवैज्ञानिक नहीं है। आधुनिक विज्ञान भी इस बात को मानने लगा है। अब तो डॉक्टर भी उपवास से होने वाले फायदों के बारे में लोगों को जागरूक कर रहे हैं। जैन धर्म में तप आत्मा को तपाने के लिए किया जाता है, जिससे मोक्ष की प्राप्ति हो सके जिसका शरीर को भी फायदा मिलता ही है। इसलिए अपनी क्षमता के अनुसार तप जरूर करना चाहिए। आचार्य सुंदर सागर महाराज जयपुर के सांगानेर क्षेत्र में चित्रकूट कॉलोनी स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। जैन पत्रकार महासंघ के तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी का विषय था, ‘कलिकाल में तप की महिमा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से’। आचार्य ने कहा कि इस बात को समझना होगा कि जैन धर्म में केवल तप की ही बात नहीं कही गई है बल्कि “उत्तम तप” की बात कही गई है। यानी ऐसा तप जो मोक्ष मार्ग की तरफ ले जाने के लिए किया गया हो। भौतिकवादी दृष्टि से भी तप का महत्व है। इससे बीमारियों से बचाव होता है और स्वस्थ जीवन जीने में मदद मिलती है। आचार्य ने कहा कि हमें युवा पीढ़ी को भी तप का महत्व समझाना चाहिए। धर्म और तप से जुड़े युवा वर्ग के सवालों का सही जवाब दिया जाना चाहिए, ताकि वे बात को समझें। इस संबंध में तर्क तो किए जाने चाहिए लेकिन कुतर्क नहीं करने चाहिए। धर्म और इससे जुड़ी क्रियाएं श्रद्धा का विषय तो हैं ही, किंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि धर्म में तर्क का अभाव है। जैन दर्शन तर्क प्रधान है, जहां प्रत्येक क्रिया के पीछे समुचित कारण और उद्देश्य निहित हैं। इसलिए धर्म से जुड़े सवालों से बचना नहीं चाहिए और उनका सही जवाब दिया जाना चाहिए। इससे युवा वर्ग में धर्म और इससे जुड़ी क्रियाओं की स्वीकार्यता बढ़ेगी।
इस अवसर पर आर्यिका सुकाम्यमति ने कहा कि असल में लोग भौतिकता के प्रभाव के कारण सही गलत की पहचान नहीं कर पाते। पैकिंग और विज्ञापन आकर्षक होने से लोग भ्रमित हो जाते हैं। इस चक्कर में वे गलत विचारों और वस्तुओं की तरफ भी आकर्षित हो जाते हैं। केवल भूखे—प्यासे रहना ही तप नहीं है। जैन धर्म में दो तरह के तपों का वर्णन आता है। बाह्य तप और आभ्यंतर तप। दिगम्बर संत शरीर ही नहीं तपाते, आत्मा को भी तपाते हैं और मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ते हैं। संगोष्ठी के प्रमुख वक्ता राजस्थान विश्वविद्यालय के डॉ. रोहित कुमार जैन ने बताया कि जैन जीवन पद्धति का मूल आधार ” उत्तम तप” है , परंतु आज हमने अपनी परंपराओं और धार्मिक आचरण के पीछे छिपे कार्य – कारण संबंधों को खोजना और समझना छोड़ दिया है। इसी कारण आज युवा पीढ़ी धर्म से विमुख होती जा रही है। उन्होंने कहा कि हम सभी धर्म को जानते तो हैं , पर मानते नहीं हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम जानने और मानने के बीच के अंतर को कम करें। आज हम धर्म के पीछे चलते हैं, साथ नहीं चलते। यही कारण है कि हम धार्मिक क्रियाओं की वैज्ञानिकता और उनकी तर्क संगतता को समाज के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं।
जैन पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश जैन तिजारिया की अध्यक्षता में तीन सत्रों में संगोष्ठी और पत्रकार सम्मेलन शुरू हुआ। जैन पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने बताया कि संगोष्ठी का शुभारंभ आर्यिका सुकम्यामति के मंगलाचरण से किया गया। अतिथियों ने चित्र अनावरण व दीप प्रज्ज्वलन किया। आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन परवेश जैन सांगानेर परिवार ने किया और रमेश जैन तिजारिया परिवार ने शास्त्र भेंट किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने स्वागत उद्बोधन व महासंघ की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। समाज सेवी कमल बाबू जैन ने समाज में हो रही विभिन्न गतिविधियों पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश जैन तिजारिया ने अध्यक्षीय उद्बोधन रखते हुए जैन पत्रकार महासंघ की कार्यशैली विचारधारा व विभिन्न उद्देश्यों पर व्यापक प्रकाश डाला। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक दीपक गोधा ने बताया कि राजाबाबू गोधा,चक्रेश जैन समाचार जगत, राष्ट्रीय प्रचार मंत्री महेंद्र बैराठी, महासंघ के राष्ट्रीय मंत्री राकेश चपलमन कोटा, महासंघ के राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंत्री संजय बड़जात्या कामां, महासंघ के संरक्षक व पूर्व विधायक सुनील जैन सागर, दैनिक आचरण की प्रबन्ध सम्पादक श्रीमती निधि जैन सागर, सी. एस. जैन, दीपक गोधा, विमल बज, बलवंत राय मेहता, वी.बी. जैन, महावीर सरावगी नैनवां, महेंद्र जैन लावा मालपुरा, मनीष जैन उदयपुर, अभिषेक जैन अनौरा ललितपुर, डॉ. कल्पना जैन नोएडा, अमित जैन विजयनगर,सुरेन्द्र कुमार जैन,उदयभान जैन बड़जात्या, राजस्थान जैन सभा के जिनेन्द्र जैन आदि वक्ताओं ने तप की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि दिगम्बर सन्तों की प्रत्येक क्रिया में विज्ञान झलकता है। आहार, विहार,ध्यान,योग व मौन साधना को विज्ञान ने तर्क सहित स्वीकार किया है। कार्यक्रम में मंच का कुशल संचालन जिनेन्द्र जैन प्रताप नगर, जीतू जैन व उदयभान जैन जयपुर ने किया ।
कार्यक्रम में मन्दिर समिति के अध्यक्ष अनिल जैन काशीपुरा, मूलचंद पाटनी, परवेश जैन, राजेश चौधरी, सत्य प्रकाश जैन,ओम प्रकाश जैन कटारिया, राजीव जैन गाजियाबाद सहित अन्य पदाधिकारियों ने उपस्थित पत्रकारों का अभिनंदन व स्वागत किया। कार्यक्रम में महासंघ के संरक्षक सदस्य पदम बिलाला, कार्यक्रम संयोजक चक्रेश जैन, राकेश गोदिका शाबाश इन्डिया, सुरेन्द्र प्रकाश जैन, राजीव जैन, ज्ञानचंद पाटनी, विनोद जैन कोटखावदा, सतीश अकेला, मनोज जैन आदिनाथ मीडिया, मुकेश जैन राजस्थान पत्रिका, आशीष जैन ललितपुर, मुकेश जैन समाचार जगत, सनी जैन अग्रवाल, रवि कुमार जैन नैनवां, हीरा चंद वैद, राजेंद्र वैद, सुनील कुमार जैन दैनिक भास्कर, प्रकाश पाटनी भीलवाड़ा, रविंद्र काला बूंदी, शेखर पाटनी मदनगंज किशनगढ़, संजय जैन मदनगंज किशनगढ़, मनोज कासलीवाल फागी महानगर टाइम्स , लेशिष जैन महानगर टाइम्स, युवा पत्रकार अमन जैन कोटखावदा, राजेंद्र जैन कोटा, पुष्पेन्द्र जैन सीकरी, आलोक जैन समाचार जगत, पीयूष लुहाड़िया आदर्श चिराग, मनोज सोगानी, स्वतंत्र पत्रकार रीमा गोधा, प्रदीप जैन लाला सहित कई पत्रकार और प्रबुद्धजन कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम के अंत में आचार्य सुन्दर सागर महाराज ने सभी आगंतुकों को आशीर्वाद प्रदान किया।
