अभिमत
अमेरिकी कांग्रेस के लिए हाल ही में तैयार हुई रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि इस साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष यानी ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान का पलड़ा भारी रहा। साथ ही चीन ने इसका लाभ उठाते हुए अपने आधुनिक हथियारों का परीक्षण और प्रचार किया। इस रिपोर्ट ने भारत के लिए नया संकट खड़ा किया है। इससे साफ हो जाता है कि अमेरिका भारत को कमतर दिखाने का कोई अवसर नहीं छोड़ना चाहता। अमेरिका का भारत विरोधी रवैया लगातार सामने आ रहा है। साथ ही रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए नरसंहार को ‘विद्रोहियों का हमला’ बताकर पाकिस्तान को क्लीन चिट देने की कोशिश की है। इससे अमेरिका की मंशा का स्पष्ट पता चलता है।
रिपोर्ट के अनुसार मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुआ सैन्य टकराव बेहद तीव्र था। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान ने सैन्य स्तर पर भारत पर बढ़त हासिल की। इस संघर्ष में चीन की भूमिका भी चर्चा में आई। इसमें कहा गया है कि चीन ने पाकिस्तान को खुफिया सहयोग और हथियार देकर पूरा सहयोग किया। अमरीका ने इस रिपोर्ट के जरिए भारत की साख को चोट पहुंचाने की कोशिश की है, जो वाकई चिंता की बात है। फिलहाल भारत सरकार ने अमेरिका में चल रही इस नैरेटिव’ का प्रभावी जवाब नहीं दिया है। भारत के प्रति अमेरिकी रवैया लगातार बदलता रहा है। एक ओर अमेरिका भारत को एक रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है, दूसरी तरफ राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप बार-बार ऐसे निर्णय और दावे कर रहे हैं, जिनसे लगता है कि अमेरिका भारत के हितों के खिलाफ काम कर रहा है है। ट्रंप ने कई बार अपना दावा दोहराया है कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रोका है, लेकिन भारत ने तृतीय पक्ष की मध्यस्थता को हमेशा से खारिज किया है। अब इस नई रिपोर्ट के जरिए भारत को नीचा दिखाने और पाकिस्तान के कुकृत्य पर पर्दा डालने का प्रयास किया गया है।
रिपोर्ट में विशेष रूप से बताया गया है कि चीन ने इस संघर्ष का फायदा उठाते हुए अपने कई आधुनिक हथियार जैसे कि जे-10 लड़ाकू विमान, एचक्यू-9 एयर डिफेंस सिस्टम और पीएल-15 एयर-टू-एयर मिसाइल का परीक्षण किया। चीन ने इस अवसर का उपयोग अपने हथियारों के वैश्विक बाजार में प्रचार के लिए किया, जिससे उसकी रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिला। पाकिस्तान को मिल रही चीनी मदद से तो एकदम इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इस संषर्घ में पाकिस्तान का पलड़ा भारी रहने की बात हजम होने वाली नहीं। पहलगाम के आतंकी हमले को भी विद्रोहियों का हमला बताना स्वीकार्य नहीं है।
भारत के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि इससे उसकी वैश्विक छवि और सुरक्षा रणनीति प्रभावित हो सकती है। इस बीच, पाकिस्तान ने इस रिपोर्ट को अपनी विजय के रूप में पेश किया है और चीन के समर्थन पर खुलकर विश्वास व्यक्त किया है। यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन (यूएससीसी) की यह रिपोर्ट भारत के लिए एक गंभीर चुनौती है।
अमेरिका के बदलते और अनिश्चित रवैये ने भारत के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। चीन की द्विपक्षीय टकराव में भागीदारी और अपना सैन्य सामर्थ्य दिखाने की रणनीति ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इस पूरे घटनाक्रम में भारत के लिए जरूरी है कि वह न केवल अपनी सैन्य क्षमता मजबूत करे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाए ताकि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक प्रतिष्ठा दोनों अक्षुण्ण रह सकें। साथ ही अमेरिका की दोहरी नीतियों से भी सावधान रहे।
