अभिमत
भारत—चीन संबंधों में अरुणाचल प्रदेश एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। हाल ही में यूके में रहने वाली अरुणाचल प्रदेश की मूल निवासी महिला पेमा थोंगडोक के साथ शंघाई एयरपोर्ट पर हुए घटनाक्रम से यह विवाद फिर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। इस घटनाक्रम से चीन के कुटिल इरादों का भी पता चलता है।
हुआ यूं कि शंघाई एयरपोर्ट पर चीन के इमिग्रेशन अधिकारियों ने पेमा थोंगडोक को 18 घंटे तक रोका। अधिकारियों ने उसका पासपोर्ट पहचानने से मना कर दिया और कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा नहीं है। भारत सरकार ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अविभाज्य हिस्सा है और इस बात में कोई संदेह नहीं हो सकता। इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय ने चीन की इस कार्रवाई को निंदनीय और “बहुत बेकार” बताया है।
यह पहली बार नहीं है जब चीन ने अरुणाचल प्रदेश को लेकर इस प्रकार के दावे किए हों। 2023 में भी चीन ने चेंगदू में आयोजित समर वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स के लिए अरुणाचल प्रदेश के तीन एथलीटों को स्टेपल्ड वीजा जारी किया था, जो दो देशों के बीच तनाव का कारण बना था। चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है।
चीन की रणनीति में अरुणाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों के नाम बदलकर उन्हें चीनी नाम देना भी शामिल है। 2017, 2021 और 2025 में चीन ने कई स्थानों के नाम बदलने की कवायद की, जिसका भारत ने सख्त विरोध किया और इसे बेकार और बेतुकी कोशिश बताया है।
भारत का स्पष्ट कहना है कि अरुणाचल प्रदेश भारतीय सीमा के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण राज्य है, जिसके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार्य नहीं है। ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच रिश्ते सामान्य हो रहे हैं। प्रधानमंत्री पिछले दिनों चीन यात्रा पर गए थे। इससे ऐसा लगा था कि दोनों देशों के संबंध तेजी से सुधर रहे हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं नकारात्मक माहौल पैदा करती हैं। इस विवाद की जटिलता भारत-चीन संबंधों की गहरी चुनौतियों को दर्शाती है। भारत को विदेश नीति के स्तर पर संतुलन बनाकर रखने के साथ चीन से मिलने वाली हर तरह की चुनौती से निपटने लिए तैयार रहना होगा।
