अभिमत
वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेल भारत के अहमदाबाद में होने जा रहे हैं। यह आयोजन भारत के लिए एक ऐतिहासिक और गर्व का पल होगा। ये खेल 20 साल बाद देश में दोबारा होंगे। भारत में पहली बार 2010 में नई दिल्ली में यह बड़ी प्रतियोगिता संपन्न हुई थी। अहमदाबाद को मेजबानी का प्रतिनिधि शहर चुनना इस बात का संकेत है कि भारत एक वैश्विक खेल ठिकाने के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना चाहता है। इस आयोजन से भारत के खेल क्षेत्र को नई ऊंचाइयां मिलेंगी।
राष्ट्रमंडल खेलों की पहली बार मेजबानी के ठीक दो दशक बाद, भारत इस चतुर्वार्षिक प्रतियोगिता के शताब्दी संस्करण का स्वागत कर रहा है। यह आयोजन अहमदाबाद में होगा, जिसे खेल के लिहाज से एक महत्वपूर्ण जगह माना जाता है। अहमदाबाद की यह मेजबानी भारत की उन महत्वाकांक्षाओं को दर्शाती है, जिनमें साल 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी भी शामिल है। भारत ने इसके लिए अहमदाबाद को सबसे उपयुक्त शहर के रूप में पेश किया है।
हालांकि राष्ट्रमंडल खेल अपने प्रारंभिक महत्व और साम्राज्यवादी एकता के प्रतीक के तौर पर लोकप्रिय थे, लेकिन अब ये खेल उत्तर-औपनिवेशिक दुनिया में अपनी प्रासंगिकता की चुनौती से जूझ रहे हैं। मेजबान शहरों के बढ़ते खर्च और चुनौतियों के कारण कई जगहों से इन्हें आयोजित करने से पीछे हटने की खबरें आई हैं। उदाहरण के लिए 2022 में डरबन के स्थान पर बर्मिंघम ने मेजबानी की और ऑस्ट्रेलियाई राज्य विक्टोरिया के पीछे हटने के बाद 2026 में ग्लासगो में यह आयोजन होने जा रहा है। वर्ष 2030 के लिए अहमदाबाद को कनाडा के अल्बर्टा से बढ़त मिली।
आयोजन के पीछे का बड़ा कारण भारत का दीर्घकालिक दृष्टिकोण है। अब देश में क्रिकेट से आगे बढ़कर अन्य खेलों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। नीरज चोपड़ा जैसे ओलंपिक पदक विजेता खिलाड़ियों के आने से युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिली है। इससे बुनियादी ढांचों और खेल प्रशिक्षण में सुधार की उम्मीद बढ़ी है, जिससे एथलीटों और जनता दोनों को लाभ होगा।
हालांकि खेलों के आकार में कमी और खेलों के चयन में भी बदलाव आए हैं। 2026 में ग्लासगो में हो रहे आयोजन में केवल 10 खेल होंगे, जिसमें कई लोकप्रिय खेल जैसे बैडमिंटन, हॉकी और क्रिकेट शामिल नहीं होंगे। भारत के पदक प्रदर्शन की तुलना ओलंपिक से करने पर पता चलता है कि राष्ट्रमंडल खेलों में अपेक्षाकृत बेहतर सफलता रही, लेकिन डोपिंग जैसी समस्याओं ने देश की छवि को प्रभावित किया है। इसलिए 2030 में अहमदाबाद में आयोजित होने वाले खेलों के दौरान उच्च मानकों और नैतिक खेल भावना का ध्यान रखना होगा, जिससे भारत की खेल प्रतिष्ठा को और मजबूती मिले। आर्थिक दृष्टि से भी राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन चुनौतीपूर्ण है। खेल आयोजन में बढ़ती लागत के बीच भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि खर्च पर नियंत्रण रहे। साथ ही पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे, जिससे 2010 जैसे अनियमितता के आरोप न लगें।
निश्चित रूप से राष्ट्रमंडल खेल भारत के लिए एक अवसर साबित होंगे। भारत खेलों के माध्यम से अपनी संस्कृति, संगठन क्षमता और युवा प्रतिभा को विश्व स्तर पर प्रदर्शित कर सकेगा। इस आयोजन का उद्देश्य केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक मजबूत खेल इकोसिस्टम के निर्माण और देश की सॉफ्ट पावर बढ़ाना भी है। आशा है अहमदाबाद में होने वाले राष्ट्रमंडल खेल भारत के खिलाड़ियों को प्रेरित करने, बुनियादी खेल संरचना को मजबूत करने और वैश्विक खेल मंच पर देश की प्रतिष्ठा को बढ़ावा दे
