अभिमत

सड़क से संसद तक विरोध की आवाज उठने के बाद केंद्र सरकार ने साइबर सुरक्षा एप ‘संचार साथी’ से जुड़ा ताजा आदेश वापस ले लिया। केंद्र सरकार ने हाल ही में आदेश दिया था कि स्मार्टफोन में साइबर सुरक्षा एप ‘संचार साथी’ को अनिवार्य रूप से पहले से इंस्टॉल करना होगा और मौजूदा फोन पर इसे सॉफ्टवेयर अपडेट के माध्यम से लगाया जाएगा। इस आदेश से तीव्र विवाद पैदा हो गया। विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे मोबाइल उपयोगकर्ताओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताया और कहा कि इससे लोगों की डिजिटल गतिविधियों की निगरानी हो सकती है।

सरकार ने ‘संचार साथी’ एप को अनिवार्य करने के लिए तर्क दिया कि तेजी से डिजिटल होती दुनिया में साइबर अपराध बढ़ रहे हैं। लोगों को इससे सुरक्षा प्रदान करना आवश्यक है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष 22.68 लाख नागरिक साइबर अपराध का शिकार हुए, जिनके आर्थिक नुकसान करोड़ों में है। इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय ने भी डिजिटल धोखाधड़ी पर सक्रिय कार्रवाई की गुजारिश की है। इसलिए सरकार ने साइबर धोखाधड़ी से बचाव के लिए ‘संचार साथी’ को अनिवार्य बनाने का निर्णय लिया था। इसका विरोध हुआ। इसे नागरिकों की निजता पर बेजा सरकारी नियंत्रण बताया गया।

एप ​को इस तरह इंस्टॉल करने के आदेश दिए गए ​थे कि इसे हटाना या अक्षम करना असंभव था। हालांकि सरकार ने बाद में स्पष्ट किया कि एप को हटाने का विकल्प मौजूद रहेगा, लेकिन विरोध होता रहा। इसके बाद सरकार को ‘संचार साथी’ एप को मोबाइल में पहले से इंस्टाल करने का आदेश आपस लेना पड़ा

वास्तविकता यह है कि ‘संचार साथी’ पहले से इंटरनेट पर उपलब्ध है और लाखों लोगों ने इसे स्वेच्छा से डाउनलोड किया भी है। इस संदर्भ में विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के साइबर सुरक्षा टूल को अनिवार्य करने से बेहतर यह है कि सरकार व्यापक जागरूकता अभियान चलाए और नागरिकों को तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करे, ताकि वे स्वयं सतर्क और सुरक्षित रह सकें।
निजता का अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है, जिसमें डिजिटल जानकारी और मोबाइल डेटा की सुरक्षा भी शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई फैसलों में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और प्राइवेसी को मजबूत किया है। इसलिए सरकार की कोई भी पहल जब डिजिटल सुरक्षा के नाम पर हो, तब उसे नागरिकों के निजता अधिकार का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

स्मार्टफोन में किसी एप की अनिवार्यता से नागरिकों में असुरक्षा का भाव पैदा होता है और इससे उनका डिजिटल डेटा भी जोखिम में पड़ सकता है। ऐसे में सरकार का यह कर्तव्य है कि वह अपने नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा और निजता दोनों सुनिश्चित करे। साथ ही यह भी आवश्यक है कि उपभोक्ता मोबाइल और इंटरनेट से जुड़ी सावधानी का ध्यान रखें।’संचार साथी’ एप विवाद से यह स्पष्ट हुआ कि साइबर सुरक्षा और नागरिक निजता के बीच एक संवेदनशील संतुलन बनाना होगा।

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